हिंदुस्तानी फिल्में हमेशा से ही विदेशी फिल्मों से
कहानी और प्लॉट उधार लेते रहें है, पर ये पहली बार है जब हमने एक ऐसी फिल्म बनाई है जिसकी
कहानी का केंद्रीय बिन्दु ‘ज़ोमबी’ है। अमरीका मैं इस आधार पर कई फिल्में और धारावाहिक
बने हैं। पर भारतीय सिनेमा के लिए ये एक नया अनुभव है।
हालांकि इस तरीके की फिल्में ज़्यादातर हॉरर और मारकाट
के भरपूर रहती है पर “गो गोवा गॉन’ इस मामले मैं एक अपवाद है,
क्योंकि यह एक कॉमेडी शैली की फिल्म है हालांकि इस फिल्म मैं गोलीबारी की कोई कमी
नहीं है।
फिल्म की कहानी इस प्रकार है की तीन दोस्त गोवा जाते
हैं वहाँ उन्हे एक पार्टी मैं जाने का मौका मिलता है जो की रशियन माफिया ने एक नया
ड्रग लॉंच करने के लिए रखी गयी है, पर ड्रग रीयक्ट कर जाता है और उसे इस्तेमाल करने वाले
लोग ज़ोमबी मैं बदल जाते हैं और बचे हुए लोगो को मारने लगते हैं। अब इन तीन दोस्तों
को उस जगह से बच निकालना है, और उन्हे इस काम मैं मदद मिलती हैं सैफ अली खान से
जो रशियन माफिया का हिस्सा हैं।
कहानी के नाम पर आपको ज्यादा कुछ नहीं मिलेगा पर फिल्म
रफ्तार और मनोरंजन से भरपूर है, संवाद आजकल के युवा वर्ग को ध्यान मैं रख कर लिखे गए
हैं, फिल्म के गाने भी थोड़े हट कर हैं जो पहले से ही लोगो को पसंद आ
रहें है। पारिवारिक फिल्मों को पसंद करने वाले लोगो को इस फिल्म से दूर रहना चाहिए
पर नए तरीके के मनोरंजन की तलाश मैं रहने वाले लोगो के लिए ये फिल्म एक अच्छा विकल्प
है।
कुणाल खेमू को फिल्म के सबसे अच्छे संवाद मिले है जिसपे
सीटी और ताली बजनी लाज़मी हैं। हालांकि फिल्म के संवाद शरारती और कहीं कहीं पर काफी
खुले तरीके के हैं जिस पर कुछ लोग आँखें ततेर सकते हैं पर जिस वर्ग को ध्यान मैं रख
कर ये फिल्म बनाई गयी है वो शायद इसका बुरा नहीं मानेगे।
सैफ अली जो इस फिल्म के निर्माता भी हैं उन्होने ये
फिल्म बना कर एक जोखिम उठाया है जिसका नतीजा जल्द ही हमारे सामने होगा,
अंत मैं मैं यही कहूँगा की ये फिल्म मनोरंजन के लक्ष्य से बनाई गयी है और काफी हद तक
ये फिल्म अपने लक्ष्य मैं कामयाब होती है।
रेटिंग ***1/2
